Jharkhand Bulletin

बकरी शेड में रहने को मजबूर परिवार के दो बच्चों को करैत सांप ने डसा, एक की मौत; दूसरा जिंदगी और मौत से जूझ रहा

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बकरी शेड में रहने को मजबूर परिवार के दो बच्चों को करैत सांप ने डसा, एक की मौत; दूसरा जिंदगी और मौत से जूझ रहा
मनातू, पलामू। मनातू प्रखंड के तेतरडीह पंचायत अंतर्गत सुरेंद्र भुईयां के परिवार पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब जहरीले करैत सांप ने उनके दो बेटों को डस लिया। इस दर्दनाक घटना में एक बच्चे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा बच्चा अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
घटना के बाद जब झारखंड बुलेटिन की टीम मौके पर पहुंची, तो वहां की स्थिति देखकर टीम भी दंग रह गई। सुरेंद्र भुईयां के पास रहने के लिए अपना पक्का आवास तक नहीं है। पूरा परिवार एक बकरी शेड में रहने को मजबूर है। इसी बकरी शेड में जहरीला सांप घुसा और दोनों बच्चों को डस लिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गरीब परिवार को समय पर आवास योजना का लाभ मिल गया होता और सुरेंद्र भुईयां के पास रहने के लिए सुरक्षित घर होता, तो शायद आज यह दर्दनाक हादसा नहीं होता और एक मासूम की जान नहीं जाती।
चार वर्षों से आवास के लिए लगा रहा था चक्कर
मौके पर जब झारखंड बुलेटिन की टीम ने पंचायत के मुखिया से आवास को लेकर सवाल किया, तो शुरुआत में मुखिया ने दावा किया कि सुरेंद्र भुईयां को आवास पहले ही दिलाया जा चुका है। लेकिन जब सुरेंद्र भुईयां के सामने ही इस दावे की सच्चाई जानने की कोशिश की गई, तो मामला कुछ और ही सामने आया।
सुरेंद्र भुईयां ने बताया कि वह पिछले करीब चार वर्षों से आवास के लिए मुखिया के पास चक्कर लगा रहा है, लेकिन आज तक उसे आवास का लाभ नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा है?
घटना के बाद प्रशासन मौके पर मौजूद
घटना की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन और प्रखंड कार्यालय के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, घायल बच्चे का अस्पताल में इलाज जारी है। परिवार के सामने एक तरफ बच्चे की मौत का गम है, तो दूसरी तरफ दूसरा बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी आवास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर वास्तव में सुरेंद्र भुईयां जैसे जरूरतमंद परिवारों को समय पर आवास योजना का लाभ मिल जाए, तो कई परिवारों को ऐसी भयावह परिस्थितियों से बचाया जा सकता है।
झारखंड बुलेटिन की टीम इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है कि आखिर चार वर्षों से आवास के लिए आवेदन और गुहार लगा चुके है।

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