
मनरेगा में बढ़ती अनियमितताओं पर सवाल, लोकपाल का पद खाली होने से शिकायत निवारण व्यवस्था कमजोर
गरीबों को रोजगार देने वाली योजना में निगरानी तंत्र मजबूत करने की मांग, लोकपाल की नियुक्ति को बताया जरूरी
पलामू। ग्रामीण क्षेत्र के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जिसका नाम अब जी राम जी योजना किए जाने की बात सामने आ रही है, में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना में काम आवंटन से लेकर मजदूरी, मस्टर रोल, योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान तक कई स्तरों पर पारदर्शिता की कमी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा का मूल उद्देश्य गांव के जरूरतमंद लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। लेकिन निगरानी व्यवस्था कमजोर होने से योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोकपाल का पद खाली होना बना बड़ी चिंता
मनरेगा में शिकायतों की स्वतंत्र जांच और आम लोगों को राहत दिलाने के लिए लोकपाल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बताया जा रहा है कि पलामू जिले में मनरेगा लोकपाल का कार्यकाल फरवरी में समाप्त होने के बाद अब तक नए लोकपाल की नियुक्ति नहीं होने से शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था प्रभावित हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले मनरेगा से जुड़ी शिकायतों को लोकपाल के समक्ष रखने का एक स्वतंत्र माध्यम उपलब्ध था। लोकपाल द्वारा शिकायतों की जांच, संबंधित पक्षों से जानकारी लेने और आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने से आम लोगों को अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ अपनी शिकायत रखने का भरोसा मिलता था।
लेकिन लोकपाल का पद रिक्त रहने से ग्रामीणों में यह धारणा बन रही है कि शिकायतों पर प्रभावी निगरानी का एक महत्वपूर्ण स्तर कमजोर हो गया है। इसका असर मनरेगा की योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी पड़ सकता है।
रोजगार सेवकों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में रोजगार सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि निगरानी कमजोर होने की स्थिति में कुछ स्थानों पर रोजगार सेवकों द्वारा मनमानी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, योजनाओं की वास्तविक स्थिति और मजदूरी भुगतान जैसे मामलों की नियमित जांच जरूरी है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जरूरत है कि प्रशासन प्रत्येक पंचायत में मनरेगा योजनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन कराए और शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे।
सरकार से लोकपाल की शीघ्र नियुक्ति की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि पलामू जिले में मनरेगा लोकपाल की शीघ्र नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि लोकपाल केवल एक पद नहीं, बल्कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में आम लोगों के लिए शिकायत और राहत का महत्वपूर्ण माध्यम है।
सरकार यदि मनरेगा में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण चाहती है तो लोकपाल की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही पंचायत स्तर पर योजनाओं की जांच, सोशल ऑडिट, मस्टर रोल की जांच और मजदूरों को समय पर भुगतान की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
गरीबों और मजदूरों के हित से सीधे जुड़ी इस योजना में यदि निगरानी तंत्र मजबूत रहेगा तो योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा और सरकारी राशि के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
अब सवाल यह है कि जब मनरेगा में आम गरीबों की शिकायत सुनने और उसकी जांच करने के लिए लोकपाल की व्यवस्था की गई है, तो पद रिक्त रहने की स्थिति में सरकार कब तक नई नियुक्ति करेगी?





