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आदिवासी दिवस पर पलामू में दिखी संस्कृति और प्रतिभा की झलक, डीसी ने बजाया मांडर

स्कूली बच्चों ने स्टॉल लगाकर मानचित्र में उतारी अपनी धरोहर, प्रतिभावान बच्चों को किया सम्मानित
मेदिनीनगर, पलामू। आदिवासी दिवस के अवसर पर पलामू में आयोजित कार्यक्रम में जिले की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और कला की शानदार झलक देखने को मिली। जिले के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर स्थानीय संस्कृति और धरोहर को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। बच्चों ने अपनी धरोहर को मानचित्र के माध्यम से दर्शाते हुए उसकी विशेषताओं से पलामू उपायुक्त को अवगत कराया।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपने स्टॉल पर तैयार की गई विभिन्न कलाकृतियों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी सामग्रियों की जानकारी उपायुक्त को दी। बच्चों की रचनात्मकता, मेहनत और अपनी संस्कृति को समझने के प्रयास से पलामू उपायुक्त काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बच्चों की सराहना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
प्रतिभावान बच्चों को किया सम्मानित
आदिवासी दिवस के मौके पर अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पलामू जिले का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान बच्चों को भी उपायुक्त ने सम्मानित किया। बच्चों को पुरस्कार देकर उनका हौसला बढ़ाया गया और उन्हें भविष्य में भी इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया। सम्मान मिलने पर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू के आदर्शों पर चलने की अपील
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पलामू उपायुक्त ने लोगों से भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू सहित झारखंड के वीर सपूतों के आदर्शों और बताए रास्ते पर चलने की अपील की। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत से जुड़े रहने तथा इसे आगे की पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
डीसी ने बजाया मांडर, झूम उठा कार्यक्रम स्थल
कार्यक्रम के दौरान पलामू उपायुक्त ने खुद मांडर बजाकर आदिवासी संस्कृति के प्रति अपनी सहभागिता और सम्मान व्यक्त किया। उपायुक्त के मांडर बजाते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों और बच्चों में उत्साह देखने को मिला। मांडर की थाप ने पूरे माहौल को पारंपरिक रंग में रंग दिया।
आदिवासी दिवस का यह आयोजन न सिर्फ झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने वाला रहा, बल्कि स्कूली बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता को मंच देने के साथ उन्हें प्रोत्साहित करने का भी माध्यम बना। बच्चों द्वारा लगाए गए स्टॉल, मानचित्र में दर्शाई गई धरोहर, प्रतिभावान बच्चों का सम्मान और उपायुक्त का मांडर बजाना कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।

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