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लातेहार
ऑपरेशन रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी: 45 की उम्र में जंगल में चीते की तरह दौड़ रहा था रविंद्र
झारखंड के कुख्यात नक्सली और तीन दशक से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने रविंद्र गंझू की गिरफ्तारी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। ऑपरेशन की पूरी कहानी अब सामने आ रही है कि किस तरह सुरक्षा बलों ने कई किलोमीटर तक घने जंगल में उसका पीछा किया और आखिरकार उसे जिंदा गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। 45 की उम्र में रविन्द्र फुर्ती चीते जैसी थी, अगर दूसरी टीम घेरा बंदी नहीं किए रहती तो रविन्द्र गंझू को पकड़ना बहुत मुश्किल था। मिली जानकारी के अनुसार, कोबरा 209 बटालियन को गुप्त सूचना मिली थी कि रविंद्र गंझू अपने घर आया हुआ है। सूचना मिलते ही जवानों की टीम ने अभियान शुरू किया। जंगल में जवानों की आहट मिलते ही रविंद्र गंझू तेजी से भागने लगा और कई किलोमीटर तक लगातार पीछा चलता रहा।
बताया गया कि घने जंगल, पहाड़ी और दुर्गम रास्तों के बावजूद सुरक्षा बलों ने हिम्मत नहीं हारी। ऑपरेशन के दौरान दूसरी टीम ने आगे बढ़कर रास्ता रोक लिया, जिससे रविंद्र गंझू चारों ओर से घिर गया।अधिकारियों के अनुसार, यदि वह हथियार निकालकर गोली चलाता तो मुठभेड़ हो सकती थी, लेकिन उसने हालात को देखते हुए आत्मसमर्पण कर दिया।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में रविंद्र गंझू ने जंगल में छिपाए गए हथियारों और सहयोगियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां दीं। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं।
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