
बरसात में कट जाते हैं चक पंचायत के पांच गांव, पुल के इंतजार में ग्रामीण
स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी सुविधाओं से टूट जाता है संपर्क, अब तक चार गर्भवती महिलाओं की जा चुकी है जान
मनातू। पलामू जिले के मनातू प्रखंड अंतर्गत चक पंचायत के पांच गांवों के ग्रामीण आज भी एक अदद पुल की आस लगाए बैठे हैं। बरसात शुरू होते ही इन गांवों का प्रखंड मुख्यालय, पंचायत कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र और आसपास के बाजारों से संपर्क लगभग पूरी तरह टूट जाता है। नदी-नालों में पानी बढ़ने के बाद ग्रामीणों के लिए आवागमन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहता।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और स्कूली बच्चों को होती है। समय पर इलाज और अस्पताल तक पहुंच नहीं पाने के कारण अब तक चार गर्भवती महिलाओं की जान जाने का दावा ग्रामीणों ने किया है। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
चक की बेटी ने जिला टॉप किया, लेकिन सैकड़ों बेटियों की पढ़ाई प्रभावित
चक पंचायत की तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। इसी पंचायत की बेटी ईश्वर ने 12वीं की परीक्षा में जिले में टॉप कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लेकिन विडंबना यह है कि आज इसी इलाके की सैकड़ों बेटियां बरसात के दिनों में रास्ते की समस्या के कारण नियमित रूप से स्कूल जाने में असमर्थ हो जाती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र की बेटी जिला टॉप कर सकती है, वहां की दूसरी बेटियों को सिर्फ आवागमन की समस्या के कारण शिक्षा से दूर होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
पुल बना तो बदलेगी पांच गांवों की तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित स्थान पर पुल का निर्माण हो जाए तो पांच गांवों के लोगों को सालभर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा और ग्रामीणों का प्रखंड एवं पंचायत मुख्यालय से संपर्क भी सुचारू रहेगा।
पुल निर्माण की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण लगातार पलामू उपायुक्त, चतरा सांसद और पांकी विधायक से गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल का निरीक्षण कराया जाए और जल्द से जल्द पुल निर्माण की दिशा में पहल की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आवागमन का मुद्दा नहीं, बल्कि पांच गांवों के लोगों की जिंदगी, स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि वर्षों से पुल की मांग कर रहे ग्रामीणों की आवाज कब जिम्मेदारों तक पहुंचती है और कब इस समस्या का स्थायी समाधान होता है।





